डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की आधी रात वाली दोस्ती का सच

डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की आधी रात वाली दोस्ती का सच

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति सिर्फ बंद कमरों की फाइलों और औपचारिक समझौतों से नहीं चलती। कभी-कभी यह इस बात पर निर्भर करती है कि दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली नेता सुबह कितने बजे उठते हैं। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्ते हमेशा चर्चा में रहे हैं। दोनों के बीच एक अजीब सी समानता है जिसने वैश्विक राजनीति को प्रभावित किया। दोनों ही नेता बेहद कम सोने के लिए जाने जाते हैं। ट्रंप का सुबह छह बजे भारत फोन मिलाने की इच्छा जताना इसी अनोखी केमिस्ट्री का हिस्सा था।

राजनीति के गलियारों में यह किस्सा बेहद मशहूर है। अमेरिकी अधिकारी अक्सर परेशान रहते थे क्योंकि ट्रंप समय के अंतर की परवाह किए बिना वैश्विक नेताओं को फोन करना चाहते थे। जब ट्रंप ने सुबह-सुबह पीएम मोदी से बात करने की इच्छा जताई, तो उनके सलाहकारों ने उन्हें याद दिलाया कि भारत में उस समय आधी रात या तड़के का वक्त होगा। इस पर ट्रंप का जवाब सीधा था कि पीएम मोदी सोते नहीं हैं, वह बिल्कुल मेरे जैसे हैं। For another view, read: this related article.

नींद का त्याग और सत्ता का समीकरण

यह सिर्फ एक मजेदार वाकया नहीं है। यह दिखाता है कि कैसे वैश्विक मंच पर दो बड़े नेता एक-दूसरे की कार्यशैली को देखते थे। पीएम मोदी के बारे में यह बात जगजाहिर है कि वे रोजाना महज साढ़े तीन से चार घंटे की नींद लेते हैं। वे सुबह जल्दी उठकर योग करते हैं और उनका वर्कोहोलिक स्वभाव उनकी राजनीति की पहचान बन चुका है। दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप भी अपनी कम नींद और देर रात तक सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के लिए जाने जाते रहे हैं।

जब दो ऐसे नेता मिलते हैं जिनकी ऊर्जा का स्तर सामान्य से अलग हो, तो कूटनीति की रफ्तार बदल जाती है। ट्रंप और मोदी की इस ट्यूनिंग ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को एक नया मोड़ दिया था। ह्यूस्टन के 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम से लेकर अहमदाबाद के 'नमस्ते ट्रंप' तक, दोनों देशों ने इतिहास की सबसे बड़ी रैलियां देखीं। यह केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि दो शक्तिशाली शख्सियतों का व्यक्तिगत तालमेल था। Further insight on the subject has been provided by Associated Press.

व्यक्तिगत केमेस्ट्री और वैश्विक फैसले

विदेशी नीति के जानकार मानते हैं कि ट्रंप अपने कार्यकाल के दौरान उन नेताओं के प्रति अधिक आकर्षित थे जो मजबूत छवि रखते थे। पीएम मोदी की स्पष्ट निर्णय क्षमता और विशाल जनसमर्थन ने ट्रंप को प्रभावित किया। जब ट्रंप ने कहा कि मोदी मेरे जैसे हैं, तो उनका इशारा केवल सोने की आदत की तरफ नहीं था। वे उस राजनीतिक शैली की बात कर रहे थे जो लीक से हटकर फैसले लेने में विश्वास रखती है।

इस तालमेल का असर नीतियों पर भी दिखा। व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवादों के बावजूद दोनों देशों के रक्षा संबंध मजबूत हुए। टू-प्लस-टू वार्ता की शुरुआत और क्वाड संगठन को पुनर्जीवित करना इसी दौर की देन है। दोनों नेताओं ने कई बार प्रोटोकॉल तोड़े। ट्रंप का पीएम मोदी की तारीफ में कसीदे पढ़ना और उन्हें एक महान नेता बताना दोनों के आपसी विश्वास को दर्शाता था।

वैश्विक राजनीति में ऐसी व्यक्तिगत दोस्ती हमेशा फायदेमंद साबित नहीं होती क्योंकि राष्ट्रहित सर्वोपरि होते हैं। लेकिन ट्रंप और मोदी के मामले में इस व्यक्तिगत समीकरण ने नौकरशाही की बाधाओं को दूर करने में मदद की। जब शीर्ष स्तर पर संवाद इतना सीधा हो, तो बड़े फैसले जल्दी होते हैं।

अगर आप आज की तारीख में भारत-अमेरिका संबंधों को समझना चाहते हैं, तो आपको इस इतिहास को जानना होगा। नेताओं की व्यक्तिगत आदतें और उनका आपसी संवाद पूरी दुनिया की दिशा तय कर सकता है। आने वाले समय में भी जब भारत और अमेरिका के रणनीतिक रिश्तों की समीक्षा होगी, तो सुबह छह बजे फोन मिलाने की ट्रंप की वह जिद हमेशा याद की जाएगी।

AB

Akira Bennett

A former academic turned journalist, Akira Bennett brings rigorous analytical thinking to every piece, ensuring depth and accuracy in every word.